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Friday, 20 May 2016

नारी सशक्तिकरण

कविता

नारी सशक्तिकरण

कखनो माय,बाप या भाइ
त' कखनो पति या संतति
सदिखनि अप्पन पहचान लेल
आन पर आश्रित रहैछ
ओ नारि छै ने

एहि पुरुष प्रधान समाजमे
अपन आस्तित्व हेरैछ
खन काल
समताके भ्रम होइ
परञ्च अगिले क्षण
भ्रम टूटि जाइ छै

करेज पाथर क' लिय'
कियो अहाँके नञि सुनत
अहाँक संग सदिखनि अन्याय भेलए
शाइद आगुओ हैत
त' जागू
अप्पन स्थान
स्वयं सुरक्षित करु
कियो संग नञि देत

एखन त'
नारी सशक्तिकरण
एकटा व्यंग्य बुझाइत अछि।

© सुमित मिश्र ''गुंजन"
करियन ,समस्तीपुर
सम्पर्क - 8434810179

1 comment:

  1. नारी सशक्तिकरण के लिए जरुरी है की हमे इस बारे में पूरी जानकारी हो और यही कार्य मनीषा बापना जी के द्वारा बहुत अचे ढंग से किया जा रहा है और हमे उन पर गर्व ही को वो महिलाओ के लिए निरंतर अपने प्रयास कर रही है नारी सशक्तिकरण

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